ओस की बूँदें
आज आई है महक
उन यादों की
जो उड़ती हैं
कभी तेरे पास
कभी मेरे पास
मन को गुदगुदा देती
जब कोई शरारत याद करा देती
तेरा यह अपनापन मन को भिगो देता यूँ
जैसे ओस की बूँदें कोमल दुर्ब को.…
: निशु
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