उलझी डोर
बवंडर उठ रहे हैं समंदर में
कर रहे अंकित
अदृश्य आशंकाओं की ओर
बोझल मन की
अनकही गाथाओं की गूँज
अवश्य पहुंचती होगी
कर्ण से ह्रदय तक
समझलो बाँध कर
इन अनकहे तथ्यों को
एक कील से
शायद !
दूसरा कोना
इस उलझी डोर का
आये पकड़ में
और करदे सब कुछ
पूर्णत: सपष्ट
छिपा है जो
बोझल मन, वचन में.......
: निशु






