वो दस दिन
उत्तरपुस्तिका पर नीले अक्षरों से बालक ने अपना भविष्य लिखा था
उन अक्षरों में मेरा भी तो भविष्य था
उन अनजान लोगो मे खुद भी अनजान था
पर कितना अजीब है
वो दस दिन जाने क्यों मेरी समृति में बार बार चले आते है
क्यों में उन नीले अक्षरों में ही रहना बसना पसंद करता हु
शायद वो दस दिन दोबारा नसीब में नहीं होगे
उन लोगो के लिये वो दस दिन शायद मज़बूरी हो
पर मेरी लिये वही दस दिन मधुर थे
किसी ने ठीक ही कहा है मधुर पहर जल्द ही बदल जाता है
गौरव कालरा
रात्रि 10:38 पर
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